क्या राम और कृष्ण नबी थे ? हदीस में क्या लिखा है ?
रिसालत
सवाल :– कुरआन मज़ीद में है " व इम-मिन उम्मतिन इल्ला ख़ला फ़ीहा नज़ीर " (सूरह फ़ातिर रुकू 03) | यानी " कोई ऐसी कौम नहीं जिसमें अल्लाह के तरफ से कोई डराने वाला न आया हो " और दूसरी जगह पर फरमाया गया है : " वलिकुल्ली क़ौमिन हादिन " (सूरह रअद रुकू 01) | यानी " हर कौम के लिए हिदायत करने वाला भेजा गया है । "
इन आयतों से मालूम होता है कि हर मुल्क और हर कौम में अल्लाह की तरफ से कोई पैगंबर भेजा गया है ! तो क्या हिन्दुस्तान में भी कोई पैगंबर आए थे ?
जवाब :– हां ! इन आयतों से बेशक यह बात साबित होती है कि हर कौम के लिए अल्लाह ने कोई डराने वाला भेजा है , और इसीलिए मुमकीन है कि हिन्दुस्तान में भी कोई नबी आए हों ।
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सवाल :– क्या यह कह सकते हैं कि हिन्दुओं के पेशवा जैसे कृष्णजी और रामचन्द्रजी वगैरह, अल्लाह के पैगंबर थे ?
जवाब :– नहीं कह सकते ! क्योंकि पैगंबरी एक खास ओहदा था जो अल्लाह की तरफ से उसके बरगुज़ीदा और खास बन्दों को अता फरमाया जाता था । तो जब तक शरीयत से यह बात मालूम न हो जाए कि यह खास ओहदा अल्लाह तआला ने फलां शख्स को अता फरमाया था तबतक हम यह नहीं कह सकते कि वह अल्लाह का नबी था । अगर हमने बिना शरीयत और दलील के सिर्फ़ अपनी राय से किसी शख्स को पैगंबर समझ लिया और फ़िल-वाक़ा यह पैगंबर नहीं था तो अल्लाह तआला के हुज़ूर में हमसे इस गलत अकीदे का मवाखिज़ा होगा ।
इसे यू समझें ! कि अगर आपने सिर्फ अपने ख्याल से किसी शख्स को बादशाह का नाईब यानी गवर्नर जनरल समझ लिया और वह असल में गवर्नर जनरल न हो तो आप हुकूमत के नज़दीक मुजरिम होगे, कि ऐसे शख्स को जिसे बादशाह ने गवर्नर जनरल नहीं बनाया है , आपने उसे गवर्नर जनरल मानकर बादशाह की तरफ एक गलत बात की निस्बत की ।
बस गुज़िश्ता लोगों में से हम खास तौर पर उन्हीं बुजुर्गों को पैगंबर कह सकते हैं जिनका पैगंबर होना शरीयत से साबित हो और कुरआन मज़ीद या हदीस शरीफ में उन्हें पैगंबर बताया गया हो ।
हिन्दुओं या दूसरे कौमों के पेशवाओं के बारे में हम बस इतना कह सकते हैं कि अगर उनके अकीदे और अम्ल ठीक हों और उनकी तालीम आसमानी तालीम के खिलाफ़ न हो और उन्होंने अल्लाह की मख़्लूक़ की हिदायत और रहनुमाई का काम भी किया हो , तो मुमकीन है कि वो नबी हों ! लेकिन !!! , ये कहना कि वे यक़ीनन नबी थे , बेदलील बात और अटकल का तीर है ।